शहीद दिवस – नौजवान नायकों  को श्रद्धांजलि

शहीद दिवस 

नौजवान नायकों  को श्रद्धांजलि

 

ब्रिटिश शासन काल में जब अंग्रेजों के अत्याचार बहुत बढ़ने लगे तब भारत के 3 नौजवान नायक जैसे भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने इसके विरुद्ध आवाज उठाई| 1928 में उन्होंने लाहौर में जॉन सांडर्स ब्रिटिश जूनियर पुलिस अधिकारी को गोली मारकर हत्या कर दी थी| फिर उन्होंने पब्लिक सेफ्टी और ट्रेड डिस्प्यूट बिल के विरोध में सेंट्रल असेंबली में बम फेंका इन विरोधों के कारण अंग्रेजों ने उनको गिरफ्तार कर लिया। उस समय लॉर्ड इरविन वॉइस रॉय थे जिन्होंने इस मामले पर मुकदमे के लिए एक विशेष ट्रिब्यूनल का गठन किया।

इस ट्रिब्यूनल ने उन तीनों नव युवकों के खिलाफ 24 मार्च 1931 को फांसी की सजा सुनाई, परंतु 23 मार्च 1931, अर्थात् एक दिन पहले ही भगत सिंह एवं उनके साथियों को रात में ही फांसी दे दी गई।  फांसी के बाद इन नवयुवकों के शव को उनके घर वालों को नहीं सौंपा बल्कि सतलज नदी के किनारे जला दिया गया। तभी से 23 मार्च को उनको श्रद्धांजलि देने के लिए शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है|

आज भी भारत के नवयुवकों के सामने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के बलिदानों को याद कर उन्हें अपने आदर्श के रूप में देखा जाता है। इन शहीदों को सभी भारतियों का शत-शत नमन।  

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