Vertical Farming : क्या वर्टिकल फार्मिंग भविष्य की खेती का विकल्प है ?

Vertical Farming : क्या वर्टिकल फार्मिंग भविष्य की खेती का विकल्प है ?

एक अनुमान के अनुसार वर्तमान विश्व की जनसंख्या 7.7 बिलियन (अप्रैल 2019) है और संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों पर नजर डाले तो यह स्पष्ट होता है कि यह वैश्विक जनसंख्या साल 2050 तक 10 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है ऐसे में इस बड़ी हुई जनसंख्या को खिलाने के लिए खाद्य उत्पादन में 70% की वृद्धि की आवश्यकता है।

ऐसे में इस जरूरत को पूरा करने की दृष्टि से वर्टिकल फार्मिंग Vertical Farming तकनीक को एक सफलतम प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है।दरअसल, वर्टिकल फार्मिंग एक ऐसी तकनीक है जिसमें नियंत्रित वातावरण में कृषि फसलों को उगाया जाता है। इस खेती में भी नियमित खेती के समान पानी का उपयोग होता है। हालांकि, वर्टिकल फार्मिंग में अन्य संसाधनों की खपत कम होती है। संयुक्त राष्ट्र के FAO (खाद्य और कृषि संगठन) के अनुसार, पारंपरिक खेती की तुलना में वर्टिकल फार्मिंग में 75% कम कच्चे माल की खपत होती है।

भूमि क्षेत्र के संदर्भ में जहां पारंपरिक खेती में 72 वर्ग मीटर भूमि में जितने खाद्य उत्पाद उगाए जाते है, वहीं वर्टिकल फार्मिंग में इसके लिए केवल 6 वर्ग मीटर भूमि की ही आवश्यकता होती है।

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वर्टिकल फार्मिंग के तहत पौधों को मिट्टी के साथ या मिट्टी के बिना घर के अंदर ही उगाया जाता है। यह फसलों को लगातार बारिश, अनियंत्रित हवाओं और शुष्क जलवायु से बचाता है। यह शहरी क्षेत्रों के लिए बेहद अनुकूल माना जा रहा है। वर्टिकल फार्मिंग में फसल की पैदावार पारंपरिक खेती से अधिक है क्योंकि यह दो प्रमुख कृषि तकनीकों जैसे कि हाइड्रोपोनिक्स और एरोपोनिक्स पर निर्भर है।

हाइड्रोपोनिक्स तकनीक में पौधों की जड़ों को पोषक तत्वों से युक्त पानी में डुबाया जाता है और यह पौधें इससे आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त करते हैं। ऐसे ही एरोपोनिक्स एक ऐसी कृषि पद्धति है जिसमें हवा में पोषक तत्वों को छिड़का जाता है और पूर्ण बंद या अर्ध-बंद वातावरण में पौधों को उगाया जाता है।

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संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की एमिशन गैप रिपोर्ट 2019 में कहा गया है कि कृषि और परिवहन ग्रीनहाउस गैसों के सबसे बड़े उत्सर्जनकर्ताओं में से हैं। दूसरी ओर, वर्टिकल फार्मिंग का कार्बन प्रिंट बहुत कम है। नैनो कॉस्ट क्लाइमेट कंट्रोल, लो-कार्बन इलेक्ट्रिसिटी, हाई एफिशिएंट लाइटिंग के चलते वर्टिकल फार्मिंग से कम कार्बन फुट प्रिंट के लक्ष्य को भी आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।

भारत में वर्टिकल फार्मिंग साल 2019 में शुरू की गई है। ICAR इस तकनीक को सुलभ करने के लिए काम कर रहा है। हालांकि, अभी भी व्यापक स्तर पर इसके प्रयोग को आरंभ नहीं किया जा सका है।

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