Chidambaram temple : प्राचीन भारत की सैकड़ों साल पुरानी मूर्ति में ब्रह्मांड का रहस्य

पुरानी मूर्ति में ब्रह्मांड का रहस्य ज़ी हिन्दुस्तान पर के. सिद्धार्थ के साथ

Main Bharat Hoon: Tamil Nadu's ancient Chidambaram templeज़ी हिन्दुस्तान की खास पेशकश मैं भारत हूं में देखिए प्राचीन भारत की सैकड़ों साल पुरानी मूर्ति में ब्रह्मांड का रहस्य ज़ी हिन्दुस्तान पर के. सिद्धार्थ के साथ

K Siddhartha यांनी वर पोस्ट केले गुरुवार, १२ डिसेंबर, २०१९

Main Bharat Hoon: Tamil Nadu’s ancient चिदंबरम मंदिर  (Chidambaram temple) ज़ी हिन्दुस्तान की खास पेशकश मैं भारत हूं में देखिए प्राचीन भारत की सैकड़ों साल पुरानी मूर्ति में ब्रह्मांड का रहस्य ज़ी हिन्दुस्तान पर के. सिद्धार्थ के साथ

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चिदंबरम मंदिर  (Chidambaram temple) भगवान शिव को समर्पित एक हिन्दू मंदिर है जो मंदिरों की नगरी चिदंबरम के मध्य में, पौंडीचेरी से दक्षिण की ओर 78 किलोमीटर की दूरी पर और कुड्डालोर जिले के उत्तर की ओर 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, कुड्डालोर जिला भारत के दक्षिणपूर्वीय राज्य तमिलनाडु का पूर्व-मध्य भाग है

मंदिर का भवन है शहर के मध्य में स्थित है और 40 एकड़ (160,000 मी2) के क्षेत्र में फैला हुआ है। यह भगवान शिव नटराज और भगवन गोविन्दराज पेरुमल को समर्पित एक प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर है,

भगवान शिव की आनंद तांडव मुद्रा एक अत्यंत प्रसिद्ध मुद्रा है जो संसार में अनेकों लोगो द्वारा पहचानी जाती है (यहां तक कि अन्य धर्मों को मानाने वाले भी इसे हिंदुत्व की उपमा देते हैं). यह ब्रह्मांडीय नृत्य मुद्रा हमें यह बताती है कि एक भरतनाट्यम नर्तक/नर्तकी को किस प्रकार नृत्य करना चाहिए।

  • नटराज के पंजों के नीचे वाला राक्षस इस बात का प्रतीक है कि अज्ञानता उनके चरणों के नीचे है
  • उनके हाथ में उपस्थित अग्नि (नष्ट करने की शक्ति) इस बात की प्रतीक है कि वह बुराई को नष्ट करने वाले हैं
  • उनका उठाया हुआ हाथ इस बात का प्रतीक है कि वे ही समस्त जीवों के उद्धारक हैं।
  • उनके पीछे स्थित चक्र ब्रह्माण्ड का प्रतीक है।
  • उनके हाथ में सुशोभित डमरू जीवन की उत्पत्ति का प्रतीक है।

यह सब वे प्रमुख वस्तुएं है जिन्हें नटराज की मूर्ति और ब्रह्मांडीय नृत्य मुद्रा चित्रित करते हैं। मेलाकदाम्बुर मंदिर जो यहां से लगभग 32 किलोमीटर की दूरी पर है वहां एक दुर्लभ तांडव मुद्रा देखने को मिलती है। इस कराकौयल में, एक बैल के ऊपर नृत्य करते हुए नटराज और इसके चारों ओर खड़े हुए देवता चित्रित हैं, यह मंदिर में राखी गयी पाला कला शैली का एक नमूना है।

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