Solar Eclipse on Religion vs Science सूर्य_ग्रहण पर धर्म Vs विज्ञान | Dr. Sumita Mukherjee | News24

सूर्य ग्रहण पर धर्म Vs विज्ञान with Dr. Sumita Mukherjee News24

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Ensemble IAS Academy यांनी वर पोस्ट केले गुरुवार, २६ डिसेंबर, २०१९

Solar Eclipse on Religion vs Science सूर्य ग्रहण पर धर्म Vs विज्ञान  Dr. Sumita Mukherjee News24

विज्ञान की नजर से सूर्य ग्रहण Solar Eclipse

विज्ञान के अनुसार, सूर्यग्रहण के दौरान खतरनाक सोलर रेडिएशन निकलता है. यह सोलर रेडिएशन आंखों के नाजुक टिशू को नुकसान पहुंचा सकता है. इससे आपकी आंखें खराब भी हो सकती हैं.  इसे रेटिनल सनबर्न के नाम से जाना जाता है।

सूर्य ग्रहण पर की जा रही लम्बी रिसर्च से यह सामने आया है कि प्रत्येक वर्ष में कम से कम सूर्य ग्रहण की घटना देखने को मिलती है. सूर्य एक प्राकृ्तिक अद्धभुत घटना है. पूरे सौ सालों में इस प्रकार दो सौ से अधिक सूर्य ग्रहण होने की संभावनाएं बनती है. यह आवश्यक नहीं है कि होने वाले सभी सूर्य ग्रहणों को भारत में देखा जा सके, अपितु इनमें से कुछ ही भारत में देखे जा सकेगें।

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सूर्यग्रहण Solar Eclipse का धार्मिक महत्व

मत्स्य पुराण में सूर्य ग्रहण को लेकर काफी जानकारी मिलती है। इस पुराण के अनुसार, सूर्य ग्रहण का संबंध राहु-केतु और उनके द्वारा अमृत पाने की कथा से है। सागर मंथन के बाद जब अमृत बांटा जाने लगा तब स्वरभानु नाम का असुर अमृत पीने की लालसा में रूप बदलकर सूर्य और चंद्र के मध्य बैठ गया लेकिन दोनों देवताओं ने इसे पहचान लिया और इसकी शिकायत भगवान विष्णु से कर दी।

लेकिन तब तक स्वरभानु अमृत पान कर चुका था और अमृत उसके गले तक आ गया था।। जैसे ही सूर्य और चंद्र ने इसकी शिकायत की, यह दोनों देवताओं को लीलने के लिए दौड़े। भगवान विष्णु ने एक पल गंवाए बिना अपने सुदर्शन चक्र स्वरभानु असुर का सिर धड़ से अलग कर दिया।

यह असुर अमृत पी चुका था इसलिए मरकर भी जीवित रहा। इसका सिर राहु कहलाया गया और धड़ केतु।  कथा के अनुसार, उस दिन से जब भी सूर्य और चंद्रमा पास आते हैं तब राहु-केतु के प्रभाव से ग्रहण लग जाता है।

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ज्योतिष के अनुसार ग्रहण

ज्योतिषाचार्य  के अनुसार, एक साल में तीन या तीन से अधिक ग्रहण शुभ नहीं माने जाते हैं। बताया जाता है, अगर ऐसा होता है तो प्राकृतिक आपदाएं और सत्ता परिवर्तन देखने को मिलता है। ग्रहण से राजा तथा प्रजा में से किसी एक को काफी नुकसान होता है।

सूर्यग्रहण पर कुंडली में सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में आ जाते हैं और इन पर राहु-केतु की दृष्टि पर पड़ने लगती है।  चंद्रग्रहण पर सूर्य और चंद्रमा आमने-सामने आ जाते हैं और इनके साथ राहु एवं केतु भी होते हैं। ग्रहों की ये स्थिति मानसिक तनाव बढ़ाने वाली होती है। इसके प्रभाव से लोगों में अनजाना डर रहता है और लोग गलत फैसले भी लेने लगते हैं।

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