Sri Lanka Election | श्रीलंका में राजपक्षे की जीत भारत से संबंधों पर असर

Sri Lanka Election | श्रीलंका में चीन समर्थक राजपक्षे की जीत

श्रीलंका में राष्ट्रपति चुनाव में पूर्व राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे के छोटे भाई और पूर्व रक्षा मंत्री गोटाबाया राजपक्षे ने सत्तारुढ़ पार्टी के उम्मीदवार साजित प्रेमदासा को हराकर जीत हासिल की है। गोटाबाया को 52.25% वोट मिले। गोटाबाया राजपक्षे को अधिकांश सिंहली बहुल वाले दक्षिणी जिलों में जीत मिली है। तमिल बहुल उत्तरी इलाके में गोटाबाया राजपक्षे को सिर्फ 15 फीसद वोट मिलने से साफ है कि अल्पसंख्यकों के मन में उनके लिए काफी संदेह है। हारने वाले उम्मीदवार साजित प्रेमदासा पूर्व राष्ट्रपति रणसिंघे प्रेमदासा के बेटे हैं। गोटाबाया का भारत से पुराना संबंध रहा है। उन्होंने 1980 में असम में उग्रवाद विरोधी अभ्यास में हिस्सा लिया था। वर्ष 1983 में उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन में स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की।‘लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम’ (लिट्टे) के साथ तीन दशक से चल रहे गृह युद्ध को खत्म करने का श्रेय भी राजपक्षे परिवार को ही दिया जाता है।
श्रीलंका में गृह युद्ध जब खत्म हुआ तब गोटाबाया राजपक्षे देश के रक्षा मंत्री थे ।
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इस चुनाव में गोटाबाया की जीत को श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे की ही जीत के तौर पर भी देखा जा रहा है। गोटाबाया के बड़े भाई महिंद्रा राजपक्षे वर्ष 2005 से 2015 तक श्रीलंका के राष्ट्रपति थे। उस समय गोटाबाया रक्षा मंत्री थे। श्रीलंका के संविधान में नियम है कि एक व्यक्ति अधिकतम दो ही बार राष्ट्रपति के पद पर रह सकता है। इसलिए महिंद्रा राजपक्षे ने अपने भाई को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया था।
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